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भारत में छोटे व्यवसायों के लिए शीर्ष 5 सरकारी ऋण योजनाएँ

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मार्च 09, 2023
Modified on
अगस्त 01, 2025
सरकारी ऋण योजनाएँ

उद्यमिता को बढ़ावा देने और युवाओं को रोजगार मांगने वाले की बजाए रोजगार देने वाला बनाने के लिए सरकार काफी प्रयास कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर ‘आत्मनिर्भर भारत’ की बात करते हैं. अगर कोई व्यक्ति अपना खुद का कारोबार शुरू करना चाहता है या अपने कारोबार को बढ़ाना चाहता है, तो सरकार ने ऐसे लोगों के लिए व्यवसाय कर्ज योजनाएं शुरू की हैं. केंद्र सरकार के अलावा कई राज्य सरकारें भी अपने नागरिकों को उद्यमी बनाने में मदद कर रही हैं.आइए जानते हैं कि कुछ ऐसी ही सरकार ऋण योजनाओं के बारे में.

प्रधानमंत्री मंत्री मुद्रा योजना

प्रधान मंत्री मुद्रा योजना (PMMY) एक गैर-कार्पोरेट, गैर-कृषि लघु / लघु उद्यमों को 10 लाख तक की ऋण उपलब्ध कराने के लिए आठ अप्रैल 2015 को शुरू की गई थी. इसमें वाणिज्यिक बैंक, आरआरबी, लघु वित्त बैंक, सहकारी बैंक, एमएफआई और एनबीएफसी ऋण उपलब्ध कराते हैं. इसके तहत सीधे बैंक या www.mudra.org.in पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है. यह लघु उद्योग लोन बिना किसी गारंटी के दिया जाता है.  

माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी (MUDRA) के तहत प्रधानमंत्री लघु उद्योग लोन को ‘शिशु’, ‘किशोर’ और ‘तरुण’ के रूप में बांटा गया है.शिशु में 50 हजार रुपये तक का लोन मिलता है.किशोर में 50 हजार से पांच लाख रुपये तक का लोन मिलता है. वहीं तरुण में पांच लाख से 10 लाख तक का लोन मिलता है. 

इस योजना का लाभ उठाने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के व्यवसाय, ग्रामीण बिजनेस आइडिया, ग्रामीण क्षेत्र के लिए लघु उद्योग और शहरी क्षेत्रों के छोटी मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट,छोटे उद्योग, सर्विस सेक्टर यूनिट,दुकानदार,फल-सब्जी विक्रेता,ट्रक ऑपरेटर्स, फूड-सर्विस यूनिट,रिपेयरिंग की दुकान चलाने वाले, मशीन ऑपरेटर, कारीगर, फूड प्रोसेसिंग यूनिट,सभी प्रकार के निर्माण, व्यापार और सर्विस सेक्टर को मुद्रा योजना के तहत ऋण मिल सकता है.

स्टैंड अप इंडिया 

इस योजना की शुरुआत केंद्र सरकार ने अप्रैल 2016 में की थी. इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और सभी वर्ग की महिलाओं को उद्यमी बनाने के लिए ऋण मिलता है.अगर कोई महिला लघु उद्योग लोन चाहती है या अनुसूचित जाति या जनजाति वर्ग के किसी व्यक्ति के बिजनेस आइडिया है और वह नया कारोबार शुरू करना चाहे या सेटअप लगाना चाहे, तो उसे बैंक से 10 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक की सहायता मिल सकती है. यह योजना 2025 तक के लिए है.

सरकार ने बैंकों को अपनी हर शाखा में कम से कम एक अनुसूचित जाति, जनजाति और एक महिला को स्टैंड अप इंडिया योजना के तहत ऋण देने को कहा है. इसका लाभ केवल ‘ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट्स’यानी की पहली बार व्यवसाय शुरू करने के लिए ही मिलेगा. इसके तहत लोन व्यापार, सेवा और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में पहली बार उतर रहे लोगो को मिलेगा. इसका लाभ लेने के लिए आप सीधे बैंक से संपर्क कर सकते हैं. स्टैंड-अप इंडिया पोर्टल के जरिए ऑनलाइन लोन एप्लीकेशन दे सकते हैं. आप लीड जिला प्रबंधक (एलडीएम) से भी मिलकर अप्लाई कर सकते हैं. 

इसके तहत परियोजना की लागत का 75 फीसदी तक ऋण दिया जाता है. लेकिन अगर बाकी का 25 फीसदी लागत अगर आवेदक ने किसी अन्य लोन योजना से लिया है, तो उसे इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा. इसमें ब्याज की दर सबसे कम लागू दर होगी. इस ऋण को सात साल में लौटाना होगा. 

क्रेडिट गारंटी योजना

लघु उद्योग लोन योजना (MSME) में लोन वितरण प्रणाली को और मजबूत और आसान बनाने के लिए सरकार ने सूक्ष्म और लघु उद्यमों (CGTMSE) योजना के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट शुरू किया गया था. क्रेडिट गारंटी स्कीम के बारे में यह धारणा है कि यह कोई लोन योजना है, दरअसल यह लोन गारंटी स्कीम है. इस योजना के तहत खुदरा व्यापारी,शैक्षणिक संस्थान, कृषि और स्वयं सहायता समूहों को छोड़कर निर्माण या सर्विस सेक्टर के नए और पुराने लघु उद्योग और प्रशिक्षण संस्थान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. उद्यमियों के लिए इस योजना में टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल सुविधा दो करोड़ तक मिलती है. इसके तहत लोन राशि का 75 फीसदी या डेढ़ करोड़ रुपये तक की गारंटी कवर सुविधा उपलब्ध है. वहीं सूक्ष्म उद्यमों  को पांच लाख रुपये तक के लोन पर 85 फीसदी तक के क्रेडिट की सुविधा.सिक्किम सहित उत्तर पूर्वी क्षेत्र में संचालित एमएसएमई के स्वामित्व वाली महिलाओं के लिए 80 फीसदी क्रेडिट सुविधा उपलब्ध है. नए उद्यमियों के लिए एमएसएमई योजनाएं शुरू होने की वजह से उन्हें काफी सहूलियत मिल गई है.  एमएसएमई रिटेल ट्रेड के लिए 50 फीसदी गारंटी कवर अधिकतम 50 लाख रुपये तक मिलता है.

राजस्थान मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना 

इसका उद्देश्य राजस्थान के नागरिकों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है. इस योजना के तहत सरकार ऋण पर सब्सिडी देती है. इस योजना के तहत सरकारी बैंक, प्राइवेट बैंक, स्माल फाइनेंस बैंक, रीजनल रूरल बैंक आदि से कर्ज लिया जा सकता है.

इस योजना में अधिकतम 10 करोड़ रुपए तक का ऋण दिया जाता है. व्यापार के लिए ऋण की अधिकतम सीमा एक करोड़ रुपये है. बुनकर कार्ड धारकों को एक लाख रुपये तक के ऋण का पूरा ब्याज अनुदान के रूप में दिया जाता है. यदि बैंक ऋण पर ब्याज उक्त दर के बराबर या उससे कम है तो 100 फीसदी ब्याज अनुदान दिया जाता है. दस लाख रुपए तक के ऋण के लिए कोई सिक्योरिटी जमा करने की जरूरत नहीं है. 

ब्याज अनुदान अधिकतम अवधि पांच साल के लिए ही मिलेगा. वहीं बैंक ऋण की अवधि पांच साल से अधिक हो सकती है, लेकिन इस स्थिति में ब्याज अनुदान केवल पांच साल तक ही दिया जाएगा. इस योजना के तहत 25 लाख तक के लोन पर आठ फीसदी सब्सिडी, 25 लाख से पांच करोड़ तक पर छह फीसदी की सब्सिडी और पांच से 10 करोड़ तक के कर्ज पर पांच फीसदी की सब्सिडी दी जाती है. 

सिडबी मेक इन इंडिया सॉफ्ट लोन फंड (SMILE)

लघु उद्योग विकास बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI) इस योजना का संचालन करता है. इसका उद्देश्य नए एमएसएमई की स्थापना के लिए जरूरी लोन-इक्विटी रेश्यो को पूरा करने के लिए सॉफ्ट लोन देना है. इस योजना में ब्याज दर 8.36 फीसदी है.

निर्माण और सर्विस सेक्टर के साथ बोर्ड के नए व्यवसाय इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. उद्यमों को अपने व्यवसाय के विस्तार के लिए भी इस योजना में लोन दिया जाएगा. इस लोन को अधिकतम 10 साल में भुगतान करना होता है. इसमें तीन साल का मोराटोरियम पीरियड (लोन मिलने के बाद उसका भुगतान शुरू करने के बीच का समय)भी शामिल है. इस योजना के न्यूनतम राशि 25 लाख रुपये का ऋण दिया जाता है.